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उन्हें छत्रपति शिवाजी महाराज की भव्य प्रतिमा तक ले जाया गया। एक विशेष पगड़ी फेटा पहनाई गई और उन पर फूल फेंके गए। समारोह एक दर्जन से अधिक तुतारी के साथ शुरू हुआ। तुरही बजाने वालों ने गर्व से अपने हाथों में इस बाजे को पकड़ रखा था। और संकेत का इंतजार कर रहे थे। अपने संबोधन में शरद पवार ने तुतारी को राकांपा (एसपी) को समर्पित किया और इसे खुशी का बिगुल बताया जो जनता के लोकतंत्र को बहाल करने में मदद करेगा। शरद पवार ने कहा कि तुतारी संघर्ष के युग की शुरूआत करती है। जनता के लिए यह लोकतंत्र वापस लाएगी हम छत्रपति शिवाजी महाराज से प्रेरणा लेंगे और राकांपा (एसपी) बिगुल बजाते हुए आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि इतिहास में कई राजा और सम्राट आए और चले गए लेकिन केवल छत्रपति शिवाजी महाराज को ही जनता राजा कहा जाता था। जिन्होंने आम लोगों की सेवा की किए थे। शरद पवार ने प्रतिबद्धता जताई की एनसीपी वैचारिक युद्ध लड़ने के बाद एक आदर्श जन उन्मुख शासन के लिए छत्रपति के आदर्शों पर चलने का प्रयास करेगी। उन्होंने ने आह्वान किया अगर हम राज्य में वर्तमान परिदृश्य को बदलना चाहते हैं तो हमें एक बार फिर से लोगों को शासन बहाल करने का प्रयास करना चाहिए। छत्रपति शिवाजी महाराज और तुरही की प्रेरणा से संघर्ष और बलिदान के बाद सफलता निश्चित रुप से मिलेगी। बाद में उन्होंने राकांपा (एसपी) को एक प्रतीकात्मक तुतारी समर्पित किया। जहां जयंत पाटिल, जितेंद्र अहवाड़ और अन्य जैसे वरिष्ठ नेताओं ने तालियां बजाने वालों ने कुछ देर तक इसे बजाया। तुतारी महत्वपूर्ण और शुभ आयोजनों, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, राजनैतिक, धार्मिक या वीआईपी आयोजनों से जुड़ा है। जनता के बीच इसकी आसान पहचान है। साथ ही इसके चारों ओर एक शाही आभा है। बता दें कि जुलाई 2023 में 25 साल पहले शरद पवार द्वारा स्थापित एनसीपी विभाजित हो गई थी। जिसमें उनके भतीजे अजीत पवार के नेतृत्व वाला अलग गुट बाहर हो गया था। इस महीने फरवरी 2024 भारतीय निर्वाचन आयोग ने अजीत पवार समूह को मूल एनसीपी नाम आवंटित किया और उसका प्रतीक घड़ी भी सौंपा। कुछ दिनों बाद महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने भी अजीत पवार के पक्ष में फैसला सुनाया, जिससे शरद पवार को बिना किसी उचित नाम या चुनाव चिह्न के रह गए। आयोग ने 22 फरवरी को एनसीपी (एसपी) को तुतारी बजाता हुआ व्यक्ति चुनाव चिह्न आवंटित किया था, जिसे एनसीपी शरद पवार गुट की पार्टी ने गर्मजोशी से स्वीकार कर लिया।










